Sunday, 26 November 2017

तुम्हारा ज़र्फ़ है तुम को मोहब्बत भूल जाती है,
हमें तो जिस ने हँस कर भी पुकारा याद रहता है,
मोहब्बत में जो डूबा हो उसे साहिल से क्या लेना,
किसे इस बहर में जा कर किनारा याद रहता है।

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जिनके इरादे 'मेहनत' की स्याही से लिखे होत है... उनकी 'किस्मत' के पन्ने कभी खाली नहीं होते...!!