पी के रात को हम उनको भुलाने लगे,
शराब में गम को मिलाने लगे,
दारू भी बेवफा निकाली यारों,
नशे में तो वो और भी याद आने लगे..........!!
शराब में गम को मिलाने लगे,
दारू भी बेवफा निकाली यारों,
नशे में तो वो और भी याद आने लगे..........!!
जिनके इरादे 'मेहनत' की स्याही से लिखे होत है... उनकी 'किस्मत' के पन्ने कभी खाली नहीं होते...!!
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