हमारे दरमियाँ ये दूरियां ना होती,
गर कुछ मेरी मजबूरियाँ ना होती,
रहते ना यूं मेरे हाथ खाली,
गर रस्मों की ये बेड़ियाँ ना होती।
गर कुछ मेरी मजबूरियाँ ना होती,
रहते ना यूं मेरे हाथ खाली,
गर रस्मों की ये बेड़ियाँ ना होती।
जिनके इरादे 'मेहनत' की स्याही से लिखे होत है... उनकी 'किस्मत' के पन्ने कभी खाली नहीं होते...!!
No comments:
Post a Comment