इक़ दर्द छुपा हो सीने में, तो मुस्कान अधूरी लगती है,
जाने क्यों बिन आपके मुझको हर शाम अधूरी लगती है,
कहनी है आपसे दिल की जो, वो बात जरुरी लगती है,
आपके बिन मेरी गज़लों में , हर बात अधूरी लगती है,
दिल भी आपका हम भी आपके, एक आस जरुरी है,
अब बिन आपके मेरे दिल को, हर सांस अधूरी लगती है,
माना की जीने की खातिर, कुछ आन जरुरी लगती है,
जाने क्यों,"मन"को आपके बिन, ये शान अधूरी लगती है.....!
जाने क्यों बिन आपके मुझको हर शाम अधूरी लगती है,
कहनी है आपसे दिल की जो, वो बात जरुरी लगती है,
आपके बिन मेरी गज़लों में , हर बात अधूरी लगती है,
दिल भी आपका हम भी आपके, एक आस जरुरी है,
अब बिन आपके मेरे दिल को, हर सांस अधूरी लगती है,
माना की जीने की खातिर, कुछ आन जरुरी लगती है,
जाने क्यों,"मन"को आपके बिन, ये शान अधूरी लगती है.....!
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