Monday, 27 November 2017

मैंने पूछा कैसे जान जाते हो मेरे दिल की बातें,
तो उन्होंने कहा जब रूह में बसे हो फिर ये सवाल क्यों..........!!
मेरे सारे सवाल होंठों पर ही रह जाते है,
और आप सारे ज़वाब आँखों से दे जाते हो।
बड़ा मुश्किल है.. जज़्बातो को पन्नो पर उतारना,
हर दर्द महसूस करना पड़ता है लिखने से पहले।
अंदर.. कोई झांके तो टुकड़ो में मिलेंगे,
यह हंसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है।
गम की उलझी हुई लकीरों में अपनी तक़दीर देख लेता हूँ,
आईना देखना तो दूर रहा बस आपकी तस्वीर देख लेता हूँ......!! 
मुझे कुछ भी नहीं कहना फ़क़त इतनी गुज़ारिश है,
बस उतनी बार मिल जाओ के जितना याद आते हो।
एक पहर भी नहीं गुज़रा तुझसे रुखसत होकर,
और यूँ लग रहा है कि जैसे सदियां गुज़र गई।

जिनके इरादे 'मेहनत' की स्याही से लिखे होत है... उनकी 'किस्मत' के पन्ने कभी खाली नहीं होते...!!