Wednesday, 13 December 2017

कुछ तो अलग है शख्सियत आपकी वरना,
इतनी भीड़ में एक आप ही अपने-से क्यों लगे........!!

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जिनके इरादे 'मेहनत' की स्याही से लिखे होत है... उनकी 'किस्मत' के पन्ने कभी खाली नहीं होते...!!