Wednesday, 25 April 2018

आँख खुलते ही ओझल हो जाते हो आप,

ख्वाब बन के ऐसे क्यों सताते हो आप…

गमों को भुलाने का एक सहारा ही सही,

मेरे मुरझाए हुए दिल को बहलाते हो आप…

दूर तक बह जाते है जज़्बात तन्हा दिल के,

हसरतों के क़दमों से लिपट जाते हो आप…

शीश महल की तरह लगते हो मुझको तो,

खंडहर हुई खव्हाईशोँ को बसाते हो आप…

यादों की तरह क़ैद रहना मेरी आँखों मे,

आँसू बन कर पलकों पे चले आते हो आप…

आपकी अधूरी सी आस मे दिल धडकता तो है,

साँस लेने की साहिल को वजह दे जाते हो आप…😘

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जिनके इरादे 'मेहनत' की स्याही से लिखे होत है... उनकी 'किस्मत' के पन्ने कभी खाली नहीं होते...!!