Thursday, 30 November 2017

तमन्ना मचल रही है थोड़ा सा साथ दे दो,
बदले में ले लो सांसे मुझे अपना हाथ दे दो।
रहने लगा है ऐसा ही मेरा हाल अक्सर,
अब आँखों से बह जाते हैं ख्याल अक्सर।
पस लौट आया है हवाओं का रुख मोड़ने वाला,
दिल में फिर उतर रहा है दिल तोड़ने वाला।
शौंक नहीं है मुझे अपने जज़्बातों को यूँ सरेआम लिखने का,
मगर क्या करूँ अब जरिया ही ये है आपसे बात करने का।
इत्तफ़ाक़ से नहीं मिले हम एक दूसरे से,
इस में थोड़ी बहुत साज़िश तो खुदा की भी रही होगी।
ना चाहते हुए भी जब दिल मेरा छूते हो,
रूहानी मोहब्बत पर और यक़ीन आ जाता है।
ना दिल की चली ना आँखों की,
हम तो दीवाने बस आपकी  मुस्कान के हो गए.....!! 

जिनके इरादे 'मेहनत' की स्याही से लिखे होत है... उनकी 'किस्मत' के पन्ने कभी खाली नहीं होते...!!